Singrauli News: झींगुरदा रेलवे रैक से कोयला चोरी का खेल जंगल-नर्सरी बनीं ‘सेफ जोन’, अनपरा का नायडू फिर हुआ सक्रिय

By: Editor

On: Sunday, September 20, 2026 10:59 AM

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सिंगरौली/मोरवा। एनसीएल झींगुरदा परियोजना क्षेत्र में रेलवे रैक से बड़े पैमाने पर कोयला चोरी किए जाने का मामला सामने आया है। मोरवा थाना क्षेत्र के झींगुरदा के जंगल, नर्सरी और आसपास के सुनसान इलाकों में कोयला छिपाकर रखे जाने की सूचना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि उत्तर प्रदेश के अनपरा क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा ‘नायडू’ नाम का व्यक्ति इन गतिविधियों में सक्रिय है

 

सिक्योरिटी को मिली जानकारी, फिर भी कोयला बरामद नहीं

 

सूत्रों सेमली जानकारी के अनुसार झींगुरदा रेलवे रैक से कोयला उतारे जाने की सूचना एनसीएल सिक्योरिटी तक पहुंची। सूचना मिलने के बाद सुरक्षा कर्मियों द्वारा मौके पर दबिश दिए जाने की बात सामने आ रही है। लेकिन बताया जा रहा है कि झाड़ियों और सुनसान स्थानों में छिपाकर रखा गया कोयला मौके से उठाया नहीं जा सका।

 

यही बात अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है कि जब सुरक्षा अमले को कोयला चोरी और उसे छिपाकर रखे जाने की जानकारी थी, तो कार्रवाई के बाद भी कथित रूप से कोयला मौके पर क्यों रह गया?

 

कभी श्मशान घाट के पास, कभी नर्सरी तो कभी जंगल

 

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक झींगुरदा क्षेत्र में कथित कोयला चोरी का तरीका भी लगातार बदलता रहता है। आरोप है कि चोरी का कोयला कभी श्मशान घाट के आसपास, कभी नर्सरी क्षेत्र में तो कभी घने जंगलों और झाड़ियों के बीच छिपाकर रखा जाता है।

 

सुनसान और झाड़ियों से घिरे इन स्थानों को कथित तौर पर चोरी के कोयले को अस्थायी रूप से छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जाने की चर्चा है। इसके बाद मौका देखकर कोयले को आगे ले जाने की बात भी सामने आ रही है।

 

अनपरा कनेक्शन की चर्चा ने बढ़ाई हलचल

 

इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश के अनपरा क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे नायडू का नाम स्थानीय चर्चाओं में सामने आ रहा है। आरोप है कि वह मोरवा क्षेत्र में सक्रिय होकर कथित रूप से कोयला चोरी के नेटवर्क को संचालित कर रहा है।

 

अनपरा के व्यक्ति झींगुरदा क्षेत्र में कैसे सक्रिय हुआ और उसे स्थानीय स्तर पर किस प्रकार की मदद या नेटवर्क उपलब्ध है।

 

झींगुरदा रेलवे रैक की सुरक्षा पर भी सवाल

 

रेलवे रैक से कोयला चोरी का मामला केवल चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एनसीएल की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है। आखिर रैक से कोयला बाहर निकालने की प्रक्रिया में कितने स्तर की निगरानी होती है? यदि चोरी की सूचना सुरक्षा कर्मियों तक पहुंच रही है, तो चोरी के बाद कोयला कहां ले जाया जा रहा है और उसे कौन लोग ठिकाने लगा रहे हैं इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जंगल और नर्सरी जैसे क्षेत्रों में चोरी का कोयला लंबे समय तक छिपाकर रखा जा रहा है, तो इन स्थानों की नियमित निगरानी और औचक जांच की व्यवस्था पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

‘मफूज अड्डा’ बनने का आरोप, जांच से खुलेगा राज

 

झींगुरदा के जंगल और नर्सरी क्षेत्र को कथित कोयला चोरों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनाए जाने की चर्चा के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि इन इलाकों में नियमित पेट्रोलिंग कितनी प्रभावी है। यदि रेलवे रैक से निकाला गया कोयला इन स्थानों पर जमा किया जा रहा है, तो यह एक संगठित नेटवर्क की ओर संकेत कर रहा है

 

अब निगाहें एनसीएल सिक्योरिटी और मोरवा पुलिस की कार्रवाई पर हैं। मौके पर छिपाकर रखे गए कोयले की बरामदगी, उसकी मात्रा, स्रोत और उसे वहां तक पहुंचाने वालों की पहचान इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है।

 

जांच हुई तो कई कड़ियां जुड़ सकती हैं

 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कोयला चोरी की सूचना पहले से सुरक्षा अमले को थी, तो कार्रवाई के बाद भी कथित रूप से कोयला मौके पर कैसे रह गया? क्या चोरी करने वाले मौके से पहले ही निकल गए थे, या फिर निगरानी व्यवस्था में कोई कमी रह गई?

 

फिलहाल झींगुरदा क्षेत्र में कोयला चोरी की चर्चाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एनसीएल प्रबंधन द्वारा मौके की जांच, कोयले की बरामदगी और सीसीटीवी/रेलवे रैक से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।

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