बैंक ऑफ महाराष्ट्र लूटकांड की जांच में कथित मास्टरमाइंड पीयूष जायसवाल से पूछताछ के बावजूद पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा। आरोपी को 1 अक्टूबर को ओडिशा की जेल से प्रोडक्शन वारंट पर सिंगरौली लाया गया था। पूछताछ के बाद उसे पचोर जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई में लूटे गए सोने या नकदी की कोई बरामदगी भी नहीं हो सकी।
गौरतलब है कि 17 अप्रैल को बैढ़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में दिनदहाड़े हुई लूट के बाद से पुलिस अंतरराज्यीय गिरोह की भूमिका की जांच कर रही है। इस मामले में पीयूष जायसवाल की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया था। पुलिस उसे पूछताछ के लिए सिंगरौली लेकर आई थी, ताकि वारदात की साजिश, गिरोह के अन्य सदस्यों और लूटे गए माल के संबंध में जानकारी जुटाई जा सके। परंतु सिंगरौली पुलिस अधीक्षक के अनुसार पूछताछ के बाद भी आरोपी से लूटे गए सोने और नकदी की बरामदगी नहीं हो सकी। न ही पुलिस को ऐसा कोई ठोस सुराग मिला जिससे लूटे गए माल तक पहुंचा जा सके। ऐसे में मामले की जांच और लूटे गए माल की
बरामदगी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है।
कई राज्यों से जुड़े गिरोह की जांच
बैंक लूटकांड की जांच में बिहार और ओडिशा से जुड़े आरोपों की भूमिका सामने आई थी। सूत्रों के अनुसार विभिन्न राज्यों से इन्होंने मिलाकर कुल 90 किलो सोना लूटा है। पुलिस विभिन्न आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह की गतिविधियों की पड़ताल कर रही है। हालांकि, पीयूष जायसवाल से पूछताछ के बाद भी लूटे गए माल की बरामदगी नहीं होना जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बना हुआ है।







