Singrauli News: एनसीएल जयंत में ब्लास्टिंग से मचा हड़कंप, घरों तक पहुंचा मलबा, घर में मौजूद लोगों को चोट लगने का दावा

By: Editor

On: Saturday, October 3, 2026 11:00 AM

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सिंगरौली: NCL जयंत में ब्लास्टिंग से हड़कंप, घरों तक पहुंचा मलबा; लोगों ने जताई सुरक्षा को लेकर चिंता

 

चड्ढा कंपनी की ब्लास्टिंग पर गंभीर आरोप, DGMS के सुरक्षा मानकों को लेकर उठे सवाल; शिकायत लेकर मोरवा थाने पहुंचे लोग

 

सिंगरौली। एनसीएल जयंत परियोजना क्षेत्र में ब्लास्टिंग को लेकर एक बार फिर स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया। शनिवार को हुई कथित ब्लास्टिंग के बाद मलबा आबादी क्षेत्र में स्थित घरों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ब्लास्टिंग के दौरान उड़कर आए मलबे से घरों में मौजूद लोगों को चोटें भी आई हैं। हालांकि, चोटों और ब्लास्टिंग से हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

 

स्थानीय लोगों के मुताबिक, ब्लास्टिंग के दौरान अचानक तेज धमाके के साथ पत्थर और मलबा आसपास के क्षेत्र में आकर गिरा। इससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घरों के आसपास मलबा मिलने के बाद कई लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था और ब्लास्टिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

 

बैठक के बाद भी नहीं थमा मामला

 

बताया जा रहा है कि ब्लास्टिंग और उससे प्रभावित आबादी को लेकर पूर्व में एनसीएल प्रबंधन एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई थी। बैठक में सुरक्षा संबंधी चिंताओं और आबादी क्षेत्र पर ब्लास्टिंग के संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा होने की बात सामने आई थी।

 

इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका और आज फिर ब्लास्टिंग के बाद मलबा घरों तक पहुंच गया। इससे लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि पहले से सुरक्षा संबंधी शिकायतें सामने आ चुकी थीं, तो उसके बाद भी ऐसी स्थिति दोबारा कैसे बनी?

 

चड्ढा कंपनी की भूमिका पर सवाल

 

स्थानीय स्तर पर इस ब्लास्टिंग को चड्ढा कंपनी से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि ब्लास्टिंग निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप की गई थी, तो आखिर मलबा आबादी और घरों तक कैसे पहुंचा?

 

हालांकि, कंपनी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए ब्लास्टिंग की जिम्मेदारी, तकनीकी प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

 

DGMS के सुरक्षा मानकों की होगी जांच?

 

मामले ने खान सुरक्षा से जुड़े नियमों और DGMS के निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि ब्लास्टिंग की तकनीकी जांच कराई जाए और यह देखा जाए कि निर्धारित क्षेत्र, ब्लास्टिंग की मात्रा, सुरक्षा दूरी, चेतावनी प्रक्रिया तथा अन्य निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ था या नहीं।

 

लोगों का कहना है कि खनन क्षेत्र के आसपास आबादी होने की स्थिति में सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

 

शिकायत लेकर मोरवा थाने पहुंचे लोग

 

ब्लास्टिंग के बाद कई स्थानीय लोग अपनी शिकायत लेकर मोरवा थाना पहुंचे और मामले में कार्रवाई की मांग की। लोगों ने ब्लास्टिंग से घरों तक मलबा पहुंचने तथा कथित रूप से लोगों के घायल होने की शिकायत करते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।

 

अब सवाल यह है कि प्रशासन और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां मामले को कितनी गंभीरता से लेती हैं। क्या मौके का निरीक्षण कर ब्लास्टिंग के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाएगी? क्या कथित रूप से प्रभावित लोगों के घरों और संपत्ति का निरीक्षण होगा? और यदि जांच में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन सामने आता है, तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी?

 

फिलहाल स्थानीय लोगों की निगाहें एनसीएल प्रबंधन, जिला प्रशासन और संबंधित खान सुरक्षा अधिकारियों की जांच एवं कार्रवाई पर टिकी हैं।

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